मेरा गाँव पर सरल निबंध-Simple essay on my village! | Mera Gaon par saral Essay in Hindi
मेरा गाँव एक बहुत ही छोटा सा गाँव है । जो कि भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आजमगढ़ जिले में स्थित है। मेरे गाँव का नाम कलहोरा हैै। जहाँ पर हिंदी और भोजपुरी भाषा मुख्य रूप से बोली जाती है। मेरा गाँव चारो तरफ से खेतों से घिरा हुआ है और यहाँ पर तरह तरह के फूल, पेड़, पौधे देखने को मिलते हैं। मेरे गाँव में सूबह के समय इतनी शांति होती है कि पक्षियों की चहचाहट बहुत ही मधुर लगती है। मेरे गाँव में सभी लोग मिल जुलकर रहते हैं और यहाँ आमतौर पर संयुक्त परिवार है। यहाँ कै लोगों का मुख्य पेशा खेती और पशुपालन है।
मेरे गाँव में एक बहुत शिव जी का बड़ा मंदिर है । मंदिर के थोड़ी दूर पर एक नदी बहती है । जिसमें हम सब कभी कभी नहाने जाते हैं। नदी के नजदीक ही एक बहुत बड़ा वट वृक्ष है जहाँ पर हर रोज संध्यकाल के समय बुजुर्गों की बैठक लगती है और ताश खेला जाता है। गलियों में बच्चे खेलते हुए दिखाई देते हैं और आज भी काकी चाची दही से मक्खन निकालती हुई दिखाई देती है। मेरे गाँव में एक स्कूल भी है जहाँ हम सब बच्चे पढ़ने जाते हैं और यहाँ पर बिजली पानी की भी उच्च व्यवस्था है। गाँव में एक छोटा सा चिक्त्सालय भी है।
मेरे गाँव में एक जो शिव का मंदिर है उसी मंदिर के थोड़ी दूर पर राधा कृष्ण और श्री हनुमान जी का भी मंदिर है जहाँ पर शिवरात्रि के दिनों में बहुत बड़ा मेला लगता है। शिव जी के दर्शन करने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं और जिससे चारो तरफ रोनक लगी रहती है। मेरे गाँव में कपड़े, गहने आदि का बाजार नहीं है और यह सब सामान खरीदने के लिए हमें शहर जाना पड़ता है। मेरे गाँव में सभी त्योहार बड़ी खुशी के साथ एक साथ मनाए जाते हैं। मेरे गाँव में बहुत सारे खुले मैदान भी है जहाँ हम क्रिकेट खेलते हैं और दौड़ लगाते हैं। मेरे गाँव में वाहन कम चलते हैं और हरियाली होने की वजह से प्रदुषण बिल्कुल भी नहीं है। सुबह सुबह ताजगी और शुद्ध हवा में साँस लेने का मजा ही कुछ और हैं। सांयकाल में जब गायों को बाँधा जाता है तो उनके पैरों से धूल उड़ती है और सूर्योदय धुँधला सा लगता है क्योंकि यहाँ की सड़के पक्की नहीं हैं। मैं अपने गांव से बहुत प्यार करता हूं। मुझे हरपाल गांव की बहुत याद आती है।
मेरे गांव में सभी लोग मिलजुल कर रहते है।
धन्यवाद
काशी कुमार गौतम उर्फ निराला
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