जनसंख्या Population I संकेत बिंदु – (Indication mark) जनसंख्या वृद्धि के कारण (Due to population growth) , जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम(Effects of population growth) · समाधान (Solution)

 

जनसंख्या (Population)

संकेत बिंदु – (Indication mark)

·                जनसंख्या वृद्धि के कारण (Due to population growth)    

·                जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम(Effects of population growth)

·                समाधान (Solution)

 

जनसंख्या वृद्धि के कारण

1.    जन्म-दर और मृत्यु – दर  में अंतर (Difference between birth rate and death rate)

 किसी देश में एक वर्ष में जनसंख्या के प्रति हजार व्यक्तियों में जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की संख्या जन्म-दरकहलाती है। जन्म-दर अधिक होने पर जनसंख्या वृद्धि भी अधिक होती है, भारत में जन्म-दर बहुत अधिक है। किसी देश में जनसंख्या के प्रति हजार व्यक्तियों पर एक वर्ष में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को मृत्यु दर कहतें हैं। किसी देश की मृत्यु दर जितनी ऊॅंची होगी जनसंख्या वृद्धि दर उतनी ही नीची होगी। भारत में मृत्यु दर में कमी के फलस्वरूप जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है।

2.          विवाह एवं सन्तान प्राप्ति की अनिवार्यता(Essentials of marriage and procuring children)

हमारे यहॉं सभी युवक व युवतियों के विवाह की प्रथा है और साथ ही सन्तान उत्पत्ति को धार्मिक एवं सामाजिक दृष्टि से आदरपूर्ण माना जाता है।

3.          अशिक्षा एवं अज्ञानता (Illiteracy and ignorance)

आज भी हमारे देश में अधिकांश लोग निरक्षर है। अशिक्षा के कारण अज्ञानता का अंधकार फेला हुआ है। कम पढे लिखे होने के कारण लोगो को परिवार नियोजन के उपायो की ठीक से जानकारी नहीं हो पाती है। लोग आज भी बच्चो को भगवान की देन मानते है। अज्ञानता के कारण लोगो के मन में अंधविश्वास भरा है। 

4.          बाल विवाह (Child Marriage)

आज भी हमारे देश में बाल विवाह तथा कम उम्र में विवाह जैसी कुप्रथाएँ प्रचलित है। जल्दी शादी होने के कारण किशोर जल्दी माँ बाप बन जाते है। इससे बच्चे अधिक पैदा होते है। उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पडता है। कम उम्र में विवाहित होने वाले अधिकांश युवा आर्थिक रूप से दूसरो पर आश्रित होते है तथा बच्चे पैदा कर अन्य आश्रितो की संख्या बढाते है। परिणामस्वरूप कमाने वालो की संख्या कम और खाने वालो की संख्या अधिक हो जाती है। अत: सरकार ने 18 वर्ष से कम उम्र में लडकियों की तथा 21 वर्ष से कम उम्र मे लडको की शादी कानूनन अपराध घोषित किया है। 

5.          अंधविश्वास (Superstition)

आज भी अधिकांश लोगो का मानना है कि बच्चे ईश्वर की देन है ईश्वर की इच्छा को न मानने से वे नाराज हो जाएंगे। कुछ लोगो का मानना है कि संतान अधिक होने से काम में हाथ बंटाते है जिससे उन्हे बुढापे में आराम मिलेगा। परिवार नियोजन के उपायो को मानना वे ईश्वर की इच्छा के विरूद्ध मानते है। इन प्रचलित अंधविश्वास से जनसंख्या में नियंत्रण पाना असंभव सा लगता है। 

6.          लडके की चाह मे लडकियाँ पैदा करना (To produce girls in want of a boy)

लोग सोचते है कि लडका ही पिता की जायदाद का असली वारिस होता है तथा बेटा ही अंतिम संस्कार तक साथ रहता है और बेटियाँ पराई होती है। इससे लडके लडकियों में भेदभाव को बढावा मिलता है। बेटे की चाह में लडकियाँ पैदा करते चले जाते है। लडके लडकियो के पालन पोषण में भी भेदभाव किया जाता है। व्यवहार से लेकर खानपान में असमानता पाई जाती है। परिणामस्वरूप लडकियाँ युवावस्था या बुढापे में रोगो के शिकार हो जाती है। इसके अलावा कई पिछडे इलाको तथा कम पढे लिखे लोगो के बीच मनोरंजन की कमी के कारण वे कामवासना को ही एकमात्र संतुष्टि तथा मनोरंजन का साधन समझते है जिससे जनसंख्या बढती है। 

 

जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम

 

1. आवास की समस्या :- Housing problem: -

                देश की बढ़ती हुई जनसंख्या शहरों एवं गांवों में आवास की समस्या पैदा कर रही है | एक तरफ गांव के अधिकांश लोग एक या दो कमरे के मकान में अपने जीवन गुजार रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहरों की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा गंदी बस्तियों एवं झुग्गियों में अपना जीवन गुजार रहा है | छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक के लोगों के लिए एक अच्छा आवाज जुटा पाना बहुत बड़ी समस्या बन चुका है |

 

2. रोजगार की समस्या (Employment problem)

              भारत में जनसंख्या जितनी तेजी से बढ़ रही है उतनी तेजी से रोजगार के अवसर नहीं बढ़ पा रहे हैं | जिससे भारत में एक तरफ कम पढ़े लिखे लोगों के लिए रोजगार की समस्या पैदा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ अधिक पढ़े लिखे लोगों के लिए बड़ी प्रतिस्पर्धा की चुनौती खड़ी हो रही है|

 

3. जीवन में गुणवत्ता की कमी (Lack of quality in life)

               अधिक जनसंख्या होने के कारण आवास एवं रोजगार की समस्या पैदा हो रही है जिसकी वजह से अधिकांश लोगों के जीवन स्तर में गुणवत्ता की कमी आ रही है | सघन आबादी होने के कारण लोग कीड़े-मकोड़े की जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो रहे हैं | शहरों की झुग्गी बस्तियों में जीवन का स्तर बहुत निम्न होता है | इसी तरह गांव में भी अधिकांश लोग निम्न स्तर का जीवन जी रहे हैं |

 

4. भौतिक संसाधनों पर दबाव (Pressure on material resources)

               देश की जनसंख्या अधिक होने से देश के भौतिक संसाधनों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है | रेल एवं बसों के मैं लोगों के लिए बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही है | वहीं दूसरी तरफ अन्य संसाधनों पर भी भीड़ व मारामारी बढ़ती जा रही है |

 

5. प्राकृतिक संसाधनों का अधिक दोहन (Over exploitation of natural resources)

              अधिक जनसंख्या होने के कारण देश की जरूरतें भी अधिक होती हैं | अतः उन जरूरतों को पूरा करने के लिए देश के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन भी अधिक हो रहा है | इससे उन प्राकृतिक संसाधनों के लिए एक समस्या खड़ी हो जाएगी जो एक निश्चित मात्रा में ही उपलब्ध है | इससे आगे आने वाली पीढ़ियों का जीवन दूभर हो जाएगा |

 

6. गरीबी और अशिक्षा का माहौल (Poverty and illiteracy)

             परिवार की जनसंख्या अधिक होने के एवं उनकी आय कम होने के कारण परिवार में गरीबी एवं शिक्षा का माहौल होता है | परिवार की इस स्थिति में परिवार के मुखिया अपने बच्चों को ना ही अच्छी जिंदगी दे पाते हैं, और ना ही अच्छी शिक्षा | उनका पूरा ध्यान अपने परिवार के भरण-पोषण पर होता है | जिससे उनके परिवार का माहौल खराब रहता है |

 

 

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के उपाय/ समाधान -

1. शिक्षा का प्रसार-

भारत की 80 प्रतिशत जनसंख्या गॉंवों में निवास करती है। जनसंख्या में यह तीव्र वृद्धि देश के लिए अभिशाप बनती जा रही है। फलस्वरूप गरीबी, बेराजगारी तथा महंगाई आदि समस्यायें दिनों दिन बढ़ती जा रही है। गांवों में शिक्षा की कमी और अज्ञानता के कारण तथा नगरों में गंदी बस्तियों के लोगों में शिक्षा की कमी के कारण जनसंख्या नियंत्रण का कोई भी कार्यक्रम सफल नहीं हो पा रहा है। अतएव लोगों में शिक्षा का प्रसार कर ही जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण किया जा सकता है।

2. परिवार नियोजन(Spread education)

जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए परिवार नियोजन के विभिन्न कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है। परिवार नियोजन कार्यक्रम को जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए।

3. विवाह की आयु में वृद्धि करना(Raising the age of marriage)

हमारे देश में आज भी बाल विवाह की प्रथा है। अत: बाल-विवाह पर कारगर कानूनी रोक लगायी जानी चाहिए। साथ ही लड़के-लडकियों की विवाह की उम्र को भी बढ़ाई जानी चाहिए।

4. परिवार नियोजन संबंधी शिक्षा (Family planning education)

लोगो को परिवार नियोजन की जानकारी देकर जनसंख्या वश्द्धि में नियंत्रण किया जा सकता है। गर्भ निरोधकों के प्रयोग से जिसमें निरोध, कापरटी, नसबंदी, गर्भ निरोधको की गोलियों का सेवन इत्यादि की जानकारी देकर तथा इनका प्रचार, प्रसार करके जनसंख्या वृद्धि मे काबू पाया जा सकता है।

5. यौन शिक्षा(sex education)

आज भी हमारे समाज में यौन संबंधों को छिपाने की चीज समझा ज्ञाता है। लोग यौन संबंधी बातें तथा उससे जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बातें करने से कतराते है। यौन संबंधी जानकारी न होने के कारण लोग असमय तथा अधिक बच्चे पैदा करते है। यौन संबंधी जानकारी से जनसंख्या वृद्धि को रोकने में सहायता मिल सकती है।

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