मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों का सारांश


मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों का सारांश

1.  नमक का दरोगा
2.   बूढ़ी काकी
3.  पूस की रात
4.  पंच परमेश्वर 
5.  ईदगाह 
6.  दो बैलों की कथा  
7.  शतरंज के खिलाड़ी
8.  कफ़न

1.  कहानी : नमक का दरोगा

सारांश  : नमक का दरोगा कहानी समाज की यथार्थ स्थिति को उद्घाटित करती है। कहानी के नायक मुंशी वंशीधर एक ईमानदार और कर्तव्यपरायण व्यक्ति है, जो समाज में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिशाल कायम करता है । पंडित अलोपीदीन दातागंज के सबसे अधिक अमीर और इज्जतदार व्यक्ति थे। जिनकी राजनीति में भी अच्छी पकड़ थी। अधिकांश अधिकारी उनके अहसान तले दबे हुए थे। अलोपीदीन ने धन के बल पर सभी बर्गों के व्यक्तियों को गुलाम बना रखा था। दरोगा मुंशी वंशीधर उसकी नमक की गाड़ियों को पकड़ लेता हैऔर अलोपीदीन कोअदालत में गुनाहगार के रूप में प्रस्तुत करता हैलेकिन वकील और प्रशासनिक आधिकारी उसे निर्दोष साबित कर देते हैंजिसके बाद वंशीधर को नौकरी से बेदखल कर दिया जाता है। इसके उपरांत पंडित अलोपीदीनवंशीधर के घर जाके माफी माँगता है और अपने कारोवार में स्थाई मैनेजर बना देता है तथा उसकी  ईमानदारी और कर्त्तव्य निष्ठा के आगे नतमस्तक हो जाता है।

2.  कहानी : बूढ़ी काकी

  सारांश : वक्त के साथ बहुत कुछ बदल गया लेकिन मुंशी प्रेमचन्द की कहानी बूढ़ी काकी की है। आज भी प्रासंगिक है। बुजुर्गों की बात चलती है तो प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार मुंशी प्रेमचन्द की      मार्मिक कहानी बूढ़ी काकी याद हो आती है। बुजुर्ग को लोग नसीहत देते हैं। उनकी उपेक्षा करते      हैंअवहेलना करते हैं। मुंशी प्रेमचंद की कहानी बूढी काकी आज भी हमारे सामने आइने की तरह है।

3.  कहानी : पूस की रात
   सारांश : पूस की रात: मुंशी प्रेंमचंद ने कहानी 'पूस की रातमें भारतीय किसान की लाचारी का यथार्थ   चित्रण किया है। जिसमें उत्तर भारत के किसी एक गाँव मेंहल्कू नामक एक गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। किसी की जमीन में खेती करता था। पर आमदानी कुछ भी नहीं थी। उसकी पत्नी खेती करना छोडकर और कहीं मजदूरी करने कहती थी। हल्कू के लगान के तीर पर दूसरों की खेती थी। खेत के मालिक का बकाया था। हल्कू ने अपनी पत्नी से तीन रुपए माँगे। पत्नी ने देने से इनकार कियाये तीन रुपिए जाडे की रातों से बचने केलिएकंबल खरीदने के लिये जमा करके रखे थे। बाद में पूस की रातें जब आती हैंतो किसान के खेत को नीलगाय बर्बाद कर चुके होते हैं। ये कहानी खेती-किसानी की कठिनाई बयान करती हैसाथ ही पयालनवाद पर चोट करती है।

4.  कहानी : पंच परमेश्वर 
सारांश : पंच-परमेश्वर में दो मित्रों की कहानी है। सच और ईमानदारी की कहानी है। जलन और द्वेष की कहानी है। साथ ही जिम्मेदार पद की गरिमा की रक्षा की कहानी है। जुम्मन साहू और अलगू चौधरी इस कहानी के मुख्य पात्र हैं।

5.  कहानी : ईदगाह  
सारांश  : ईदगाह कहानी एक ऐसे बच्चे की कहानी हैजो साल भर ईद का इंतजार करता है। और जब उसे मेले के लिए नाम मात्र के पैसे मिलते हैं। तो भी वो खुद पर न खर्च कर अपनी दादी के लिए चिमटा खरीदता है। जिसकी कमी की वजह से उसकी दादी का हाथ रोटियां बनाते समय हमेशा जलता रहता है। पूरी कहानी बालमन के इर्द-गिर्म मार्मिक तरीके से घूमती है। ये प्रेमचंद का ही कमाल है कि ईदगाह का जिक्र आते ही ईश्वर के स्थान पर जाने के साथ ही खुद प्रेमचंद भी याद आते हैं।

6.  कहानी : दो बैलों की कथा  
सारांश  : मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'दो बैलों की कथाको हम सब बचपन की पाठ्य पुस्तकों में पढ़ चुके हैं। ये कहानी हीरा-मोती नाम के बैलों की कहानी है। जो आपस में बेहद प्रेमपूर्ण तरीके से रहते हैं। सभी सुख-दुख साथ झेलते हैं। कहानी में झूरी हैजो दोनों का मालिक है। कहानी में झूरी की पत्नी हैजो हीरा-मोती से प्रेम करती है। कहानी में झूरी का साला गया भी हैजो क्रूर है। वो हीरा-मोती को अपने घर ले जाता हैपर हांड तोड़ मेहनत तो लेता हैखाने को कुछ नहीं देता। दोनों बैल वहां से भाग निकलते हैं। रास्ते में सांड से लड़ाई होती हैजिसमें दोनों बैल बाजी मार जाते हैं। और तमाम मुश्किलों को झेलते हुए वापस झूरी तक पहुंचते हैंजो दोनों को गलेसे लगा लेता है। इस कहानी में मुंशी प्रेमचंद ने जानवरों की समझदारी और इंसानी प्रेम को दर्शाया गया है।

7.  कहानी : शतरंज के खिलाड़ी
सारांश  : शतरंज के खिलाड़ी की रचना मुंशी प्रेमचंद ने अक्टूबर १९२४ में की थी और यह 'माधुरी'पत्रिका में छपी थी। इस कहानीको आधार बनाकर1977 में सत्यजीत राय ने इसी नाम हिन्दी फिल्म भी बनायी थी। इस कहानी में प्रेमचंद ने वाजिदअली शाह के वक्त के लखनऊ को चित्रित किया है। भोग-विलास में डूबा हुआ यह शहर राजनीतिक-सामाजिक चेतना से शून्य है। पूरा समाज इस भोग-लिप्सा में शामिल है। इस कहानी के प्रमुख पात्र मिरज़ा सज्जाद अली और मीर रौशन अली हैं। दोनों वाजिदअली शाह के जागीरदार हैं। जीवन की बुनियादी ज़रूरतों केलिए उन्हें कोई चिन्ता नहीं है। पर बाद में दोनों एक-दूसरे की तलवार से ही मारे जाते हैं।

8.  कहानी : कफ़न
सारांश  : मुंशी प्रेंमचंद की कहानी 'कफनऐसे बाप-बेटों की कहानी हैजो बेहद गरीब हैं। जिसमें बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अंदर बेटे की जवान बीवी बुधिया प्रसव वेदना से पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी, प्रकृत्ति सन्नाटे में डूबी हुईसारा गाँव अंधकार में लय हो गया था। जब निसंग भाव से कहता है कि वह बचेगी नहीं तो माधव चिढ़कर उत्तर देता है कि मरना है तो जल्दी ही क्यों नहीं मर जाती-देखकर भी वह क्या कर लेगा। लगता है जैसे कहानी के प्रारंभ में ही बड़े सांकेतिक ढंग से प्रेमचंद इशारा कर रहे हैं और भाव का अँधकार में लय हो जाना मानो पूँजीवादी व्यवस्था का ही प्रगाढ़ होता हुआ अंधेरा है जो सारे मानवीय मूल्योंसद्भाव और आत्मीयता को रौंदता हुआ निर्मम भाव से बढ़ता जा रहा है। इस औरत ने घर को एक व्यवस्था दी थीपिसाई करके या घास छीलकर वह इन दोनों बेगैरतों का दोजख (पेट) भरती रही है। और आज ये दोनों इंतजार में है कि वहमर जायेतो आराम से सोयें। आकाशवृत्ति पर जिंदा रहने वाले बाप-बेटे के लिए भुने हुए आलुओं की कीमत उस मरती हुई औरत से ज्यादा है। उनमें कोई भी इस डर से उसे देखने नहीं जाना चाहता कि उसके जाने पर दूसरा आदमी सारे आलू खा जायेगा।



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Conversation between doctor and patient. [Hindi and English]

Manushyata Class 10 Hindi Chapter 4 Summary, Explanation, Question Answers I मनुष्यता कक्षा - 10 हिंदी पाठ 4 - सारांश, स्पष्टीकरण, प्रश्न उत्तर

हजारी प्रसाद द्विवेदी के संपूर्ण साहित्य की सूची (कालक्रमानुसार), जगदीश चंद्र माथुर के नाटक, भीष्म साहनी के नाटक, लक्ष्मीनारायण लाल के नाटक, अष्टछाप के कवि,प्रथम चार वल्लभाचार्य के शिष्य🌿अंतिम चार विट्ठलदास के शिष्य,जयशंकर प्रसाद के कहानी संग्रह,