कविता - अवसर



   अवसर

 इस जीवन में एक बार बस मिलता है अवसर

एक बार जो गुजर गया तो आए न मुड़कर

जैसे सावन के जाने पर आता है पतझड़

तेल जले बाती बुझ जाए ये भी है अवसर

धूप खिल बादल छट जाए ये भी है अवसर

एक बार जो गुजर गया तो आए न मुड़कर

जैसे सावन के जाने पर आता है पतझड़

जिस्म जले प्राण उड़ जाए ये भी अवसर

सूर्य उगे चाँद छुप जाए ये भी है अवसर

एक बार जो गुजर गया तो आए न मुड़कर

जैसे सावन के जाने पर आता है पतझड़
      
   इस जीवन में एक बार बस मिलता है अवसर 




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